मघा नक्षत्र
मघा 27 नक्षत्रों में दसवाँ नक्षत्र है। यह निरयन सिंह राशि में 0° से 13°20′ तक फैला है, यानी सिंह राशि का पहला हिस्सा। इसका विंशोत्तरी स्वामी केतु और देवता पितर (पूर्वज) माने जाते हैं। आकाश में यह रेगुलस (Regulus) तारे से जुड़ा है। जन्म के समय चंद्रमा इस हिस्से में हो, तो जन्म नक्षत्र मघा कहलाता है।
मुख्य तथ्य
| क्रम | 10 / 27 |
|---|---|
| निरयन अंश | सिंह 0° से 13°20′ |
| राशि | सिंह |
| विंशोत्तरी स्वामी | केतु |
| देवता | पितर (पूर्वज) |
| प्रतीक | राजसिंहासन या पालकी |
| गण | राक्षस |
| योनि | मूषक (चूहा) |
| नाड़ी | अंत्य |
| चरण के नामाक्षर | मा, मी, मू, मे |
परंपरा में मघा
"मघा" का अर्थ है "महान" या "उदार"। प्रतीक राजसिंहासन है, इसलिए परंपरा में इसे वंश, परंपरा, सम्मान और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता से जोड़ा जाता है। पितृ पक्ष में मघा नक्षत्र का दिन कई परिवार श्राद्ध के लिए ख़ास मानते हैं। ग्रंथ इसे "उग्र" नक्षत्रों में और "गंडमूल" नक्षत्रों में गिनते हैं; कुछ परिवार इस पर पारंपरिक शांति पूजा करवाते हैं। यह एक रीति है, डरने की बात नहीं।
चरण और नामाक्षर
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं और हर चरण 3°20′ का होता है। मघा के चार चरणों के पारंपरिक नामाक्षर क्रम से मा, मी, मू, मे हैं। कई परिवार नामकरण में इन्हें देखते हैं; यह परंपरा और पसंद की बात है, अनिवार्य नियम नहीं।
मघा और विंशोत्तरी दशा
जन्म के समय चंद्रमा मघा में हो, तो विंशोत्तरी दशा केतु की महादशा से शुरू होती है। शुरुआती दशा का बचा हुआ समय इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। यह गणना सही जन्म समय पर टिकी है।
संतुलित नज़रिया
नक्षत्र जन्म कुंडली का एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं। केवल नक्षत्र के नाम से किसी के स्वभाव, सेहत या भविष्य का पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। अपना नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैसे जानें पढ़ें या मुफ़्त कुंडली बनाएं। संबंधित राशि: सिंह राशिफल। Pocket Jyotish AI AI शब्दों को समझा सकता है, पर वह इंसान नहीं है और गलती कर सकता है।
अक्सर पूछे गए सवाल
मघा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में मघा का स्वामी केतु है।
मघा नक्षत्र किस राशि में आता है?
मघा निरयन सिंह 0° से 13°20′ तक फैला है।
मघा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चार चरणों के पारंपरिक अक्षर मा, मी, मू, मे हैं।