मृगशिरा नक्षत्र
मृगशिरा 27 नक्षत्रों में पाँचवाँ नक्षत्र है। यह निरयन वृषभ 23°20′ से मिथुन 6°40′ तक फैला है, यानी पहले दो चरण वृषभ में और बाकी दो मिथुन में आते हैं। इसका विंशोत्तरी स्वामी मंगल और देवता सोम हैं। प्रतीक हिरण का सिर है।
मुख्य तथ्य
| क्रम | 5 / 27 |
|---|---|
| निरयन अंश | वृषभ 23°20′ से मिथुन 6°40′ |
| राशि | वृषभ, मिथुन |
| विंशोत्तरी स्वामी | मंगल |
| देवता | सोम (चंद्र देव) |
| प्रतीक | हिरण का सिर |
| गण | देव |
| योनि | सर्प |
| नाड़ी | मध्य |
| चरण के नामाक्षर | वे, वो, का, की |
परंपरा में मृगशिरा
"मृग" हिरण और "शिरा" सिर है। परंपरा में मृगशिरा को खोज, जिज्ञासा और कोमलता से जोड़ा जाता है, जैसे हिरण हमेशा कुछ ढूँढ़ता रहता है। ग्रंथ इसे "मृदु" (कोमल) नक्षत्रों में रखते हैं, जिसे कई पंचांग विवाह, नए कपड़े या कला से जुड़े कामों के मुहूर्त में देखते हैं।
चरण और नामाक्षर
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं और हर चरण 3°20′ का होता है। मृगशिरा के चार चरणों के पारंपरिक नामाक्षर क्रम से वे, वो, का, की हैं। कई परिवार नामकरण में इन्हें देखते हैं; यह परंपरा और पसंद की बात है, अनिवार्य नियम नहीं।
मृगशिरा और विंशोत्तरी दशा
जन्म के समय चंद्रमा मृगशिरा में हो, तो विंशोत्तरी दशा मंगल की महादशा से शुरू होती है। शुरुआती दशा का बचा हुआ समय इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। यह गणना सही जन्म समय पर टिकी है।
संतुलित नज़रिया
नक्षत्र जन्म कुंडली का एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं। केवल नक्षत्र के नाम से किसी के स्वभाव, सेहत या भविष्य का पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। अपना नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैसे जानें पढ़ें या मुफ़्त कुंडली बनाएं। संबंधित राशि: वृषभ राशिफल, मिथुन राशिफल। Pocket Jyotish AI AI शब्दों को समझा सकता है, पर वह इंसान नहीं है और गलती कर सकता है।
अक्सर पूछे गए सवाल
मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में मृगशिरा का स्वामी मंगल है।
मृगशिरा नक्षत्र किस राशि में आता है?
मृगशिरा निरयन वृषभ 23°20′ से मिथुन 6°40′ तक फैला है।
मृगशिरा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चार चरणों के पारंपरिक अक्षर वे, वो, का, की हैं।