आश्लेषा नक्षत्र
आश्लेषा 27 नक्षत्रों में नौवाँ नक्षत्र है। यह निरयन कर्क राशि में 16°40′ से 30° तक फैला है, यानी कर्क राशि का आख़िरी हिस्सा। इसका विंशोत्तरी स्वामी बुध और देवता नाग माने जाते हैं। जन्म के समय चंद्रमा इस हिस्से में हो, तो जन्म नक्षत्र आश्लेषा कहलाता है।
मुख्य तथ्य
| क्रम | 9 / 27 |
|---|---|
| निरयन अंश | कर्क 16°40′ से 30° |
| राशि | कर्क |
| विंशोत्तरी स्वामी | बुध |
| देवता | नाग (सर्प देवता) |
| प्रतीक | कुंडली मारे सर्प |
| गण | राक्षस |
| योनि | मार्जार (बिल्ली) |
| नाड़ी | अंत्य |
| चरण के नामाक्षर | डी, डू, डे, डो |
परंपरा में आश्लेषा
"आश्लेषा" का अर्थ है "लिपटना" या "आलिंगन"। परंपरा में इसे गहरी समझ, पकड़ और अंतर्ज्ञान से जोड़ा जाता है। ग्रंथ इसे "तीक्ष्ण" नक्षत्रों में और "गंडमूल" नक्षत्रों में गिनते हैं; कुछ परिवार इस पर पारंपरिक शांति पूजा करवाते हैं। यह एक रीति है, डरने की बात नहीं; किसी एक नक्षत्र से किसी का भविष्य तय नहीं होता।
चरण और नामाक्षर
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं और हर चरण 3°20′ का होता है। आश्लेषा के चार चरणों के पारंपरिक नामाक्षर क्रम से डी, डू, डे, डो हैं। कई परिवार नामकरण में इन्हें देखते हैं; यह परंपरा और पसंद की बात है, अनिवार्य नियम नहीं।
आश्लेषा और विंशोत्तरी दशा
जन्म के समय चंद्रमा आश्लेषा में हो, तो विंशोत्तरी दशा बुध की महादशा से शुरू होती है। शुरुआती दशा का बचा हुआ समय इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। यह गणना सही जन्म समय पर टिकी है।
संतुलित नज़रिया
नक्षत्र जन्म कुंडली का एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं। केवल नक्षत्र के नाम से किसी के स्वभाव, सेहत या भविष्य का पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। अपना नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैसे जानें पढ़ें या मुफ़्त कुंडली बनाएं। संबंधित राशि: कर्क राशिफल। Pocket Jyotish AI AI शब्दों को समझा सकता है, पर वह इंसान नहीं है और गलती कर सकता है।
अक्सर पूछे गए सवाल
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में आश्लेषा का स्वामी बुध है।
आश्लेषा नक्षत्र किस राशि में आता है?
आश्लेषा निरयन कर्क 16°40′ से 30° तक फैला है।
आश्लेषा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चार चरणों के पारंपरिक अक्षर डी, डू, डे, डो हैं।