पुनर्वसु नक्षत्र
पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में सातवाँ नक्षत्र है। यह निरयन मिथुन 20° से कर्क 3°20′ तक फैला है, यानी पहले तीन चरण मिथुन में और चौथा चरण कर्क में आता है। इसका विंशोत्तरी स्वामी बृहस्पति और देवता अदिति हैं। आकाश में यह पोलक्स और कैस्टर (Pollux, Castor) तारों से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
| क्रम | 7 / 27 |
|---|---|
| निरयन अंश | मिथुन 20° से कर्क 3°20′ |
| राशि | मिथुन, कर्क |
| विंशोत्तरी स्वामी | बृहस्पति (गुरु) |
| देवता | अदिति (देवताओं की माता) |
| प्रतीक | धनुष और तरकश |
| गण | देव |
| योनि | मार्जार (बिल्ली) |
| नाड़ी | आदि |
| चरण के नामाक्षर | के, को, हा, ही |
परंपरा में पुनर्वसु
"पुनर्वसु" का अर्थ है "फिर से अच्छा होना" या "प्रकाश का लौटना"। परंपरा में इसे वापसी, नवीनीकरण और घर लौटने से जोड़ा जाता है, और मान्यता है कि श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। ग्रंथ इसे "चर" (चलायमान) नक्षत्रों में रखते हैं, जिसे कई पंचांग यात्रा, वाहन या नए काम की शुरुआत के मुहूर्त में देखते हैं।
चरण और नामाक्षर
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं और हर चरण 3°20′ का होता है। पुनर्वसु के चार चरणों के पारंपरिक नामाक्षर क्रम से के, को, हा, ही हैं। कई परिवार नामकरण में इन्हें देखते हैं; यह परंपरा और पसंद की बात है, अनिवार्य नियम नहीं।
पुनर्वसु और विंशोत्तरी दशा
जन्म के समय चंद्रमा पुनर्वसु में हो, तो विंशोत्तरी दशा बृहस्पति (गुरु) की महादशा से शुरू होती है। शुरुआती दशा का बचा हुआ समय इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। यह गणना सही जन्म समय पर टिकी है।
संतुलित नज़रिया
नक्षत्र जन्म कुंडली का एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं। केवल नक्षत्र के नाम से किसी के स्वभाव, सेहत या भविष्य का पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। अपना नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैसे जानें पढ़ें या मुफ़्त कुंडली बनाएं। संबंधित राशि: मिथुन राशिफल, कर्क राशिफल। Pocket Jyotish AI AI शब्दों को समझा सकता है, पर वह इंसान नहीं है और गलती कर सकता है।
अक्सर पूछे गए सवाल
पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में पुनर्वसु का स्वामी बृहस्पति (गुरु) है।
पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में आता है?
पुनर्वसु निरयन मिथुन 20° से कर्क 3°20′ तक फैला है।
पुनर्वसु नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चार चरणों के पारंपरिक अक्षर के, को, हा, ही हैं।