पुष्य नक्षत्र
पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवाँ नक्षत्र है। यह निरयन कर्क राशि में 3°20′ से 16°40′ तक फैला है। इसका विंशोत्तरी स्वामी शनि और देवता बृहस्पति हैं। जन्म के समय चंद्रमा इस हिस्से में हो, तो जन्म नक्षत्र पुष्य कहलाता है।
मुख्य तथ्य
| क्रम | 8 / 27 |
|---|---|
| निरयन अंश | कर्क 3°20′ से 16°40′ |
| राशि | कर्क |
| विंशोत्तरी स्वामी | शनि |
| देवता | बृहस्पति (देवगुरु) |
| प्रतीक | गाय का थन, फूल या चक्र |
| गण | देव |
| योनि | मेष (भेड़/बकरा) |
| नाड़ी | मध्य |
| चरण के नामाक्षर | हु, हे, हो, डा |
परंपरा में पुष्य
"पुष्य" का अर्थ है "पोषण करने वाला"। परंपरा में इसे सबसे शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। गुरुवार को पुष्य हो तो "गुरु पुष्य योग" और रविवार को हो तो "रवि पुष्य योग" बनता है, जिसे कई परिवार सोना, घर या नई चीज़ ख़रीदने के लिए अच्छा मानते हैं। ग्रंथ इसे "क्षिप्र" (लघु) नक्षत्रों में रखते हैं। कई पंचांग इसे विवाह के मुहूर्त में नहीं लेते, यह एक पारंपरिक नियम है।
चरण और नामाक्षर
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं और हर चरण 3°20′ का होता है। पुष्य के चार चरणों के पारंपरिक नामाक्षर क्रम से हु, हे, हो, डा हैं। कई परिवार नामकरण में इन्हें देखते हैं; यह परंपरा और पसंद की बात है, अनिवार्य नियम नहीं।
पुष्य और विंशोत्तरी दशा
जन्म के समय चंद्रमा पुष्य में हो, तो विंशोत्तरी दशा शनि की महादशा से शुरू होती है। शुरुआती दशा का बचा हुआ समय इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। यह गणना सही जन्म समय पर टिकी है।
संतुलित नज़रिया
नक्षत्र जन्म कुंडली का एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं। केवल नक्षत्र के नाम से किसी के स्वभाव, सेहत या भविष्य का पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। अपना नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैसे जानें पढ़ें या मुफ़्त कुंडली बनाएं। संबंधित राशि: कर्क राशिफल। Pocket Jyotish AI AI शब्दों को समझा सकता है, पर वह इंसान नहीं है और गलती कर सकता है।
अक्सर पूछे गए सवाल
पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में पुष्य का स्वामी शनि है।
पुष्य नक्षत्र किस राशि में आता है?
पुष्य निरयन कर्क 3°20′ से 16°40′ तक फैला है।
पुष्य नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चार चरणों के पारंपरिक अक्षर हु, हे, हो, डा हैं।